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2020 में  देश के  12 स्टार्टअप्स को यूनिकॉर्न का दर्जा दिया गया, जिससे दिया जाता है, 14 लाख लोगों को रोजगार

 

 

आजकल ज्यादातर भारतीय स्टार्टअप्स में निवेशकों का रुझान बना हुआ है जिसके कारण   देश के 44 स्टार्टअप्स यूनिकॉर्न क्लब में भी शामिल हो गया है।

 

 ओरियस वेंचर पार्टनर्स की द इंडिया टेक यूनिकॉर्न रिपोर्ट-2020 के अनुसार हमारे देश के 44 यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स की वैल्यू 106 अरब डॉलर  तक हो गई है।

 

आपको बता दें कि कुछ यूनिकॉर्न  कल्ब  में भी शामिल हो चुके हैं। क्लब में शामिल होने वाले  स्टार्टअप्स, जिसमें रोजरपे, पाइनलैब्स और पोस्टमैन यूनिकॉर्न है जो कल्ब  में शामिल हो चुके हैं।

 

 आपको बता दें कि यूनिकॉर्न की सूची में सबसे पहले स्थान पर पेटीएम है जो सौरव 16 अरब डालर के साथ सूचीबद्ध है ।इन 44 यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स से प्रत्येक साल 14 लाख लोगों को रोजगार दिया जाता है।

 

 

 

दिल्ली-एनसीआर 34%

चेन्नई 02%

हैदराबाद 02%

पुणे 07%

बेंगलुरु 41%

मुंबई 14%

 

2020 में 12 स्टार्टअप्स को यूनिकॉर्न का दर्जा मिला

 

आपको बता दें कि 2020 में हमारे देश के   12 स्टार्टअप्स को यूनिकॉर्न का दर्जा दिया गया है। इन सभी में ये सभी यूनिकॉर्न स्टार्ट ऑफ शामिल है।

 

 रेजरपे, फार्मईजी, जिरोधा, नाइका डॉट कॉम, अनएकेडमी, पाइन लैब्स, पोस्टमैन, जेनोटी, ग्लांस, डेलीहंट, फर्स्टक्राई और कार्स-24 शामिल हैं। 2020 में सबसे ज्यादा यूनिकॉर्न बनने का रिकॉर्ड बन चुका है।

 

अब हम जानते हैं कि क्षेत्र में अभी तक कितना यूनिकॉर्न बन चुका है ।

 

फिनटेक 11

रिटेल 6

सॉफ्टवेयर 5

डाटा एनालिसिस 4

ऑनलाइन क्लासीफाइड्स 3

लॉजिस्टिक 3

यात्रा 3

फूड 2

शिक्षा 2

कंटेंट 1

गेमिंग 1

ट्रांसपोर्ट 1

बी2बी मार्केटप्लेस 1

सी2बी मार्केटप्लेस 1

44 में से केवल तीन सूचीबद्ध

आपको बता दें कि अभी तक देश के कुल  44 यूनिकॉर्न में से तीन  को ही बाजार में सूचीबद्ध किया गया  हैं। इसमें मेकमाईट्रिप, जस्ट डायल और नौकरी डॉट कॉम ये  सभी शामिल हैं।

 

यूनिकॉर्न बनने में 14.6 साल लगे

 

हमारे देश में  कुल सात स्टार्टअप्स को यूनिकॉर्न बनने में बहुत ज्यादा समय लग गया था कहा जाता है कि लगभग  14.6 साल का समय लग गया था। 9 स्टार्टअप्स को यूनिकॉर्न बनने में 8.7 साल लगा था।

 13 स्टार्टअप को यूनिकॉर्न बनने में 7.4 साल  का समय लग गया था। 4 स्टार्टअप को यूनिकॉर्न बनने में 5.8 साल का समय लग गया था। 8 को यूनिकॉर्न बनने में 5 साल का समय लग गया था। 3 स्टार्टअप को यूनिकॉर्न बनने में 2.4 साल का समय लगा था।

आजकल ज्यादातर भारतीय स्टार्टअप्स में निवेशकों का रुझान बना हुआ है जिसके कारण   देश के 44 स्टार्टअप्स यूनिकॉर्न क्लब में भी शामिल हो गया है।

 

 ओरियस वेंचर पार्टनर्स की द इंडिया टेक यूनिकॉर्न रिपोर्ट-2020 के अनुसार हमारे देश के 44 यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स की वैल्यू 106 अरब डॉलर  तक हो गई है।

आपको बता दें कि कुछ यूनिकॉर्न  कल्ब  में भी शामिल हो चुके हैं। क्लब में शामिल होने वाले  स्टार्टअप्स, जिसमें रोजरपे, पाइनलैब्स और पोस्टमैन यूनिकॉर्न है जो कल्ब  में शामिल हो चुके हैं।

 यूनिकार्न स्टार्टअप किसे कहते हैं

यूनिकॉर्न  एक ऐसी स्टार्टअप कंपनियों को कहा जाता से  करोड़ से भी ज्यादा से शुरू किया जाता है ।

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